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दुर्गा माँ की आरती [ मारवाडी, गुजरती में ]

   चंदा तू लारे चँदनिया ,सूरज तू लारे किरणा , तारा सुँ जडिरे माँ की आरती ,                                                    ओ मैया हम सब उतारां थारी   आरती,   [2]                                                                                                     …काला नी भैरु आओ,धोरा नी भैरु आओ,  फेर उतारो रे माँ की आरती                                                                ओ मय्या हम सब    चंदा त...

परमात्मा प्राप्ति किसे होती हॆ ?एक सुन्दर , अच्छी व शिक्षाप्रद कहानी है 🙏

एक ब्राह्मण था।वह बहुत न्याय प्रिय तथा भक्त वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य अपने इष्ट देव की बडी श्रद्धा से पूजा-पाठ और याद करता था। एक दिन इष्ट देव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा--- "ब्राह्मणदेव मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हैं। बोलो तुम्हारी कोई इछा हॆ?" परिवार को चाहने वाला ब्राह्मण बोला---"भगवन् मेरे पास आपका दिया सब कुछ हॆ।आपकी कृपा से  सब प्रकार सुख-शान्ति हॆ। फिर भी मेरी एक ईच्छा हॆ कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरे पूरे परिवार को भी दर्शन दीजिये।" "यह तो सम्भव नहीं है ।" ---भगवान ने ब्राह्मण को समझाया ।परन्तु परिवार को चाहने वाला ब्राह्मण भक्त भगवान से जिद्द् करने लगा। आखिर भगवान को अपने साधक के सामने झुकना पडा ओर वे बोले,--"ठीक है, कल अपने पूरे परिवार को उस पहाडी के पास लाना। मैं पहाडी के ऊपर से दर्शन दूँगा।" ब्राह्मण अत्यन्त प्रसन्न. हुआ और भगवान को धन्यवाद दिया। अगले दिन पूरे परिवार मे निमंत्रण दे दिया कि कल सभी पहाड के नीचे मेरे साथ चलना,वहाँ भगवान् आप सबको दर्शन देगें। दूसरे दिन ब्राह्मण समस्त परिवार और...

सपनों की बाँह पकड़े रखना-

 लक्ष्य निर्धारित कर, निखरना तू कोई कुछ भी कहे अपने एहसास को जागरूक रखना तू  कोई कुछ भी कहे  अपनी बंदगी ना छोड़ना तू कोई कुछ भी कहे  महाकाल पर भरोसा रखना तू कोई कुछ भी कहे अपने सपनों की बाँह ना छोड़ना तू ...⚘ बताना क्या सही है!! जिन्दगी भेड़चाल पर टिकी है, हमारी ही आदतें, हमें लूट रही है मेरी तरफ से तो खुदी की खुदाई डूबी जा रही है, बन्दगी में दुनियाभर की शिकायते कही जा रही हैं.... जिंदगी कहाँ है तू गुजर गया इक अरसा यादें बनाती जा रही हों क्यूँ मशीन की तरह  चलती जा रही हों, जिंदगी कहाॅ है तू क्यूँ इस तरह जिये  जारही हो!...⚘💗

याद आता नहीं

कर्मों का फल है जो,  ईश्वरीय वरदान है वो,  सोच समझकर करने का,  मानव तु भुल जाता हैं क्युं, कलयुग में कल्याण का,  ्यही एक मार्ग.... यही भुल जाता है क्युं, तेरी दुनिया बनी कर्मों से,  मानव यह याद आता नहीं क्युंं ।                                            ......स्मृति

जननी

शक्ति का संबल हैं तुझमें,  पोषण का वह मर्म हैं तुझमें, प्रकृति के पालन का संघर्ष है तुझमें,  जीवन का हर दर्द है तुझमें , दिखने में लाचारी, बेबसी लगे तुझमें,  भरें मन में ज्वाला सा अंगार हैं तुझमें, साथ मिला  जब अपने अंग का,  मजबुत हुआ एक कोना दिल का , लगे बुनने जीवन तुझमें, है जननी जीवन है तुझमें ।                                      …स्मृति    जननी तुझमें बसी हैं हम बच्चों की जान हैं                                                                                                          अगर हुआ कोई एह्सान है तो माँ का दिया जहान हैं                ...

उन्मुक्त गगन का सपना

 उनमुक्त उडुगां फिर एक दिन लिये नया सवेरा, ना पग में बेड़ी आयेगी ना होगा पिंजरें का पहरा ,  उम्मीद जगाकर  आँखों में ,मैं फिर बनाऊगाँ बसेरा  तुम भले बाँध लो पंंख मगर,  मैं फिर देखुगाँ सपना, इस पिंजरे का है घाव मगर , मैं करूंगा नियति को सुनहरा , हौसले को मेरे अभी, कहाँ देखा है तुमने इतना अभी, ये शौर्य नहीं उम्मीद है मेरी, जो बढाती हैं सबंल मेरा, जो बाधाएँ आज बनी, मज़बूत करेगी दोहरा , मैं फिर उडुगाँ उन्मुक्त गगन में लिए नया सवेरा ।''                                                                            स्मृति

कोरोना ने मोड़ा जीवन को

' कोरोना की इस दुनिया ने, दुनिया को एसा झकझकोर दिया ,   हुई दुनिया उस खोफ़ की दिवानी ,  चलता फक़ीर दुनिया डुबो गया, संदेहा तो  था सब को,  संदेहा तो था सबको,  पर इतना निकट होगा,  यह  अंदेशा नहीं था,  क्योंकि बैठें हम,  सोचे हम,  थी जो मानसिकता इस जीवन में ,  यहीं सोच स्वीकार करी उस इश्वर ने,  आओ इस सोच को बदलें  इस समय को बदलने के लिए , फिर से अपनी सोच बदलें,   ध्यान करें अपने अंर्तमन का , उन पलों को फिर से सहेजें , जो छुट गए थे किसी कोने में' ॥                                                      स्मृति..... .                                                                          ...