दुर्गा माँ की आरती [ मारवाडी, गुजरती में ]
चंदा तू लारे चँदनिया ,सूरज तू लारे किरणा , तारा सुँ जडिरे माँ की आरती , ओ मैया हम सब उतारां थारी आरती, [2] …काला नी भैरु आओ,धोरा नी भैरु आओ, फेर उतारो रे माँ की आरती ओ मय्या हम सब चंदा तू लारे चँदनिया सूरज तू लारे किरणा , तारा सुँ जडिरे माँ की आरती , ओ मैया हम सब उतारां थारी आरती, 1] …जब जब जन्म लियों माँ थाने, भोलाशकंर पाया , जब जब जन्म लियों माँ थाने, भोलाशकंर पाया [ ,कठिन तपस्या कर वाँ सू भोलावर थाने पाया, [2] शिव जी की थां पटराणी , अम्बें जगदम्बें राणी,फेर उतारो रे माँ की आरती ,ओमय्या हम सब उतारां थारी आरती……। …… चंदा तू लारे चँदनिया…………… 2] जब शक्ति को रुप धरयो माँ थर - थर देवता काँप्या [2] ब्रह्मा,विष्णु, और सदाशिव दौड्या दौड्या आया , देवा ने करि अस्तुति ,शिवजी चरणा में पड्ग्या, फेर उतारो रे माँ की आरती ओ ,मय्या हम सब उतारां रें थारी आरती चंदा तु लारे चँदनिया ……… 3] जय-जयकारी सुनि माँ अम्बें मंदिर थारा गुँजिया,[2] भजन आरती गाँवासूं मनडा सबका हर्षया ताल मँजिरा बाजे, ढोल नगाड़ा बाजे फेर उतारो रे माँ की आरती ओ मय्या हम सब उतारां रें थारी आरती … चंदा तु लारे चँदनिया … 4] जब -जब पीड़ पड़ी भक्तों पर, माँ वेगा वेगा आयां [2] आशिषोंं का आँचल भरकर फेर ठिकाने पधारयां, दुखड़ों का दुख मिटाया जो भी शरणा में आया फेर उतारो रें माँ की आरती… ओ मय्या हम सब उतारां थारी आरती चंदा तु लारे चँदनिया ……
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