सपनों की बाँह पकड़े रखना-
लक्ष्य निर्धारित कर, निखरना तू
कोई कुछ भी कहे
अपने एहसास को जागरूक रखना तू
कोई कुछ भी कहे
अपनी बंदगी ना छोड़ना तू
कोई कुछ भी कहे
महाकाल पर भरोसा रखना तू
कोई कुछ भी कहे
अपने सपनों की बाँह ना छोड़ना तू ...⚘
बताना क्या सही है!!
जिन्दगी भेड़चाल पर टिकी है,
हमारी ही आदतें, हमें लूट रही है
मेरी तरफ से तो
खुदी की खुदाई डूबी जा रही है,
बन्दगी में दुनियाभर की शिकायते
कही जा रही हैं....
जिंदगी कहाँ है तू
गुजर गया इक अरसा
यादें बनाती जा रही हों
क्यूँ मशीन की तरह
चलती जा रही हों,
जिंदगी कहाॅ है तू
क्यूँ इस तरह जिये
जारही हो!...⚘💗
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