“जय महावीर हनुमान”


गुरुजी के श्री चरणों के आशिर्वाद से :-

:     जब कलयुग की घोर निशा ,दिग भ्रांत कर रही मानवता ,

:     यम सयंम सब मिटे जा रहे, सब और बढ रही दानवता

:     महलों में राम नही ढूँढेगा, जब तक किष्किंधा की घाटी में

हा :    हाँ , पवनपुत्र के संबल बिना, निरख सकेगी ना भारत की माटी में

वी :    वीरत्व अगर जगा, तो अहिरावण की बनी आयेगी

:     रख पावे हम गौरव कैसे यह हनुमत्व गाथा सिखलाएगी,

:    हम शांती चाहते, लेकिन रावण के घर बंध आज

नु :   नुकसान सोने में हो गया अब वक्त सोने का, हनुमान बने तब बचे लाज

मा :   मानवता मुखित हो, हम सब कै काज सरे

:   नतमस्तक होकर अगर हम सब, उस महावीर का ध्यान धरे

            जय महावीर हनुमान
           “जय रघुवीर हनुमान         
                                                    ……स्मृति

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