श्रद्धान्जलि एक माँ को
ये पंक्तियाँ मेंने अपनी एक मित्र की माँ को लेकर लिखी हैं, कि आजकल ऐसा देखने को मिलता हैं, की दुनिया में रिश्तों को सिर्फ़ पैसों से तोला जाता हैं,मेरी मित्र अपनी माँ से चार साल से नहीं मीली, मीली नहीं………… मिलने नहीं दिया… ओर अब वो माँ चल बसी… ; वह बेटी क्या सोच रहीं होगी या ये भी कह सकते हैं कि इस समय मेरे मन में जो उद्ग़ार उत्पन हुए उसे मेंने अपने शब्द इस तरह दिए............
तेरी परछाई हूँ माँ, इस जग में,
तेरा एहसास ना जाने दूँगी,
तेरे जाने के बाद भी ....... 😔 ,
तेरे आशिर्वाद और एहसास् को हमेशा
उन लोगों की याद में जिन्दा सदा रखुँगी,
दुखी मत होना तु, छोड़कर मुझको,
आएगा वक्त उसका भी जिसने किया अलग हमको,
इस कायनात को दोहराता हैं वह मंज़र ,
सोच के इस एहसास को जिंदा मैं रहुँगी ।
......................स्मृति
तेरी परछाई हूँ माँ, इस जग में,
तेरा एहसास ना जाने दूँगी,
तेरे जाने के बाद भी ....... 😔 ,
तेरे आशिर्वाद और एहसास् को हमेशा
उन लोगों की याद में जिन्दा सदा रखुँगी,
दुखी मत होना तु, छोड़कर मुझको,
आएगा वक्त उसका भी जिसने किया अलग हमको,
इस कायनात को दोहराता हैं वह मंज़र ,
सोच के इस एहसास को जिंदा मैं रहुँगी ।
......................स्मृति
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