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जनवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शिक्षा का पुनरुथान करों !

शिक्षा में भारतीय मुल्यों की स्थापना करनी हैं , करना होगा एक आंदोलन करें जो देश का पुनरुत्थान, भारत शिक्षण निती में बदलाव लावें हम ,  क्रांति का आगाज़ करे हम , शिक्षा पर हो रहा शोषण का विरोध करें हम,  क्युँ नहीं होता उस पर आग़ाज़,  क्युँ मुखदर्शक बने फिरते हो, जागो !मेरे शिक्षण के जमींदारों , निती में बदलाव करों , भारतीय संस्कृति का  मूल है जो, उसे पुर्नजागृत करों,  प्राचीन सभ्यता की उज्जवला छवि को फिर तुम प्रांरभ करों ।          जय हिन्द                                                                                                                                              ...

क्रांति की पुकार

हताशा हो रही थी,भारत को जब , हर भारतवासी के मन जोश भरा , क्रांती को लेकर आया एक सेवक , शेर दिल , स्नेह,शक्ति से भरा , विश्व के स्थल पटल पर , भारत का नाम चमकाने्को , गांधी , पटेल , विवेकानंद के , स्वच्छ भारत का सपना लेकर , भारत का भाग्य बदलने को , भेजा मां ज्वाला ने उस ज्योती को , प्रकट हुई सिंहासन पर वह ज्योती , नाम है उनका नरेन्द्र मोदी                                              स्मृति............  :) 

“जय महावीर हनुमान”

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गुरुजी के श्री चरणों के आशिर्वाद से :- ज :      जब कलयुग की घोर निशा , दिग भ्रांत कर रही मानवता , य :     यम सयंम सब मिटे जा रहे , सब और बढ रही दानवता म :     महलों में राम नही ढूँढेगा , जब तक किष्किंधा की घाटी में हा :    हाँ , पवनपुत्र के संबल बिना , निरख सकेगी ना भारत की माटी में वी :    वीरत्व अगर न जगा , तो अहिरावण की बनी आयेगी र :     रख पावे हम गौरव कैसे यह हनुमत्व गाथा सिखलाएगी , ह :    हम शांती चाहते , लेकिन रावण के घर बंध आज नु :   नुकसान सोने में हो गया अब वक्त न सोने का , हनुमान बने तब बचे लाज मा :   मानवता मुखित हो , हम सब कै काज सरे न :   नतमस्तक होकर अगर हम सब , उस महावीर का ध्यान धरे             “ जय महावीर हनुमान...

भारत का सपना…।

उदय हो रहा भारत का जब                                                                                                           हर भारतवासी करें पूकार,                                                                                                        क्रांति को लेकर आया एक सेवक,  शेरदिल,महोब्बत से भरा , भारत का सम्मान वापस लाने को,  विश्वव पटल पर भारत का नाम चमकाने को,  गाँधी, पटेल , विवेकानंद के  स्वच्छ भारत का सपना साकार करने...

पारितोषिक…

 ये कविता मेने अपने स्कूल में  पर्यावरण दिवस पर एक्सिस बैंक द्वारा दिये गए सम्मान को अपने शब्द दिये थे ।                                                                                                                                                         पर्यावरण के इस पर्व में,  चुना गया हैं, ये स्कूल ,     आ गए, आर एम एस के प्रांगण में,      बरसाने यह फूल।     एक्सिस बैंक द्वारा  दिया गया सम्मान,                       कई स्कूलों ने देखकर, जाग गए अरमान।  ...