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याद आता नहीं

कर्मों का फल है जो,  ईश्वरीय वरदान है वो,  सोच समझकर करने का,  मानव तु भुल जाता हैं क्युं, कलयुग में कल्याण का,  ्यही एक मार्ग.... यही भुल जाता है क्युं, तेरी दुनिया बनी कर्मों से,  मानव यह याद आता नहीं क्युंं ।                                            ......स्मृति

जननी

शक्ति का संबल हैं तुझमें,  पोषण का वह मर्म हैं तुझमें, प्रकृति के पालन का संघर्ष है तुझमें,  जीवन का हर दर्द है तुझमें , दिखने में लाचारी, बेबसी लगे तुझमें,  भरें मन में ज्वाला सा अंगार हैं तुझमें, साथ मिला  जब अपने अंग का,  मजबुत हुआ एक कोना दिल का , लगे बुनने जीवन तुझमें, है जननी जीवन है तुझमें ।                                      …स्मृति    जननी तुझमें बसी हैं हम बच्चों की जान हैं                                                                                                          अगर हुआ कोई एह्सान है तो माँ का दिया जहान हैं                ...